FARHAN'S POETRIES FROM ZINDAGI NA MILEGI DOBARA!!!
पिघले नीलम सा बहता हुआ ये समा... नीली नीली सी खामोशियाँ... ना कहीं है ज़मी, ना कहीं आसमाँ... सरसराती हुई टहनियां, पत्तियाँ... कह रहीं हैं के बस एक तुम हो यहाँ... सिर्फ मैं हूँ, मेरी सांसें हैं और मेरी धडकनें हैं... ऎसी गहराइयाँ, ऎसी तन्हाइयां..और मैं, सिर्फ मैं... अपने होने पे मुझको यकीन आ गया........... जब जब दर्द का बादल छाया जब गम का साया लहराया जब आंसू पलकों तक आया जब यह तनहा दिल घबराया हमने दिल को ये समझाया, के दिल आखिर तू क्यूँ रोता है दुनिया में यूहीं होता है... ये जो गहरे सन्नाटे हैं वक़्त ने सबको ही बाटें है थोडा गम है सबका किस्सा, थोड़ी धूप है सबका हिस्सा आँख तेरी बेकार ही नम है, हर पल एक नया मौसम है क्यूँ तू ऐसे पल खोता है... दिल आखिर तू क्यूँ रोता है........... एक बात होटों तक है जो आई नहीं, बस आँखों से है झांकती तुमसे कभी, मुझसे कभी, बस लफ्ज़ है बांटती जिनको पहन के होटों तक आ जाये वो आवाज़ की बाहों में बाहें डाल के इठलाये वो लेकिन जो ये एक बात है, एहसास ही एहसास है खुशबु सी है जैसे हवा में तैरती खुशबु..जो बेआवाज़ है जिसका पता तुमको भी है, जिस...